Wednesday, April 21, 2010

नासमझ तो वो ना थे इतना

नासमझ तो वो ना थे इतना..
के प्यार को हमारे समझ ना सके..

नासमझ तो वो ना थे इतना..
के प्यार को हमारे समझ ना सके..

पेश किया दर्द-ए-दिल हमने नगमों मे..
उसे भी वो सिर्फ “शेर” समझ बैठे… ||१||

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बुराईया तो लाख देखी आपने..
पर दिलमॅ ना कभी झाक सके..

बुराईया तो लाख देखी आपने..
पर दिलमॅ ना कभी झाक सके..

कुसूर तो आपका भी नही है जनाब..
हम ही तो आपसे कभी कुछ कह ना सके.

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